संक्षिप्त परिचय - Bedtime story for kids
मिलिए गुड्डी से! गुड्डी एक बहुत ही प्यारी और चुलबुली गुड़िया है। उसका कमरा रंग-बिरंगे खिलौनों से भरा हुआ है। उसे दिन भर अपने दोस्तों—लाल गेंद, मखमली भालू और लकड़ी की छोटी रेलगाड़ी—के साथ खेलना बहुत पसंद है।
लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है और सोने का समय आता है, गुड्डी का चेहरा उतर जाता है। जहाँ दूसरे खिलौने आराम करने की तैयारी करते हैं, वहीं गुड्डी की छोटी सी जान चिंता में डूब जाती है।
गुड्डी को डर लगता है कि अगर उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, तो उसके खिलौनों का क्या होगा? क्या कोई उन्हें चुरा ले जाएगा? क्या उसकी लाल गेंद कहीं खो जाएगी?
इसी फिक्र में गुड्डी अपनी नींद खो देती है और पूरी रात जागकर अपने खिलौनों की पहरेदारी करती है। आइए जानते हैं, क्या गुड्डी कभी चैन से सो पाएगी?
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प्रथम संस्करण: 28 जनवरी, 2026
प्रकाशक: मिमिफ्लिक्स (mimiflix.com)
श्रेणी: Early Childhood eBooks (0–6 Years) | Bedtime Stories
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प्रस्तावना – घने जंगल की एक जादुई रात
दूर, बहुत दूर, पहाड़ों के पीछे एक घना और सुंदर जंगल था। यह कोई साधारण जंगल नहीं था, यह एक जादुई जंगल था!
जब सूरज दादा थक कर सो जाते और आसमान में चंदा मामा अपनी चांदी जैसी रोशनी फैलाते, तब इस जंगल में जादू शुरू होता था। यहाँ के पेड़ मखमली थे, पत्तियाँ धीमी आवाज़ में लोरी सुनाती थीं, और फूलों से ठंडी-मीठी खुशबू आती थी।
जंगल के बीचों-बीच एक छोटा सा, प्यारा सा घर था, जहाँ दुनिया के सबसे सुंदर खिलौने रहते थे। रात की इस शांति में, जब सारा जंगल चैन से सो रहा होता, तब वहाँ एक छोटी सी गुड़िया, गुड्डी, अपनी आँखें खोले कुछ सोच रही थी।
यह कहानी उसी जादुई रात की है, जब शांति और सपनों के बीच गुड्डी ने एक बहुत बड़ा सबक सीखा। आइए, हम भी उस घने जंगल की जादुई रात में चलें और देखें कि गुड्डी गुड़िया के साथ क्या हुआ।
गुड्डी का सुंदर कमरा और उसके प्यारे खिलौने
गुड्डी का कमरा किसी सपनों के महल जैसा था। कमरे की दीवारें हल्के गुलाबी रंग की थीं और खिड़की पर नीले रंग के पर्दे झूल रहे थे।
कमरे के हर कोने में खुशियाँ बिखरी थीं। वहाँ एक मखमली भूरा भालू था जो हमेशा मुस्कुराता रहता था। कोने में एक छोटी लकड़ी की रेलगाड़ी खड़ी थी, जो 'छुक-छुक' करने के लिए तैयार रहती थी। और हाँ, गुड्डी की सबसे प्रिय चमकदार लाल गेंद, जो उछलने में माहिर थी!
गुड्डी अपने इन सभी खिलौनों को अपनी जान से भी ज्यादा प्यार करती थी। उसके लिए ये सिर्फ खिलौने नहीं, बल्कि उसके सबसे अच्छे दोस्त थे। वह अपना सारा समय उन्हीं के साथ बिताती थी और उनका बहुत ख्याल रखती थी।
दिन भर की मस्ती और खेल-कूद का अंत
गुड्डी और उसके दोस्तों के लिए पूरा दिन किसी उत्सव जैसा होता था। सुबह से लेकर शाम तक कमरे में सिर्फ हँसी और खेल की आवाज़ें गूँजती थीं। गुड्डी कभी रेलगाड़ी पर बैठकर सवारी करती, तो कभी लाल गेंद के पीछे दौड़ती।
लेकिन देखते ही देखते, सुनहरी धूप मद्धम होने लगी। खिड़की के बाहर आसमान का रंग नारंगी और फिर धीरे-धीरे गहरा नीला होने लगा। परिंदे अपने घोंसलों की ओर लौटने लगे और जादुई जंगल पर शांति छाने लगी।
मस्ती और खेल-कूद का समय अब खत्म हो चुका था। खिलौने थक चुके थे और अब उन्हें भी थोड़े आराम की ज़रूरत थी। दिन भर की भाग-दौड़ के बाद, अब वक्त था जादुई सपनों की दुनिया में कदम रखने का।
मम्मी गुड़िया का गुड्डी को बिस्तर पर लिटाना
जैसे ही रात ने अपनी चादर फैलायी, गुड्डी की मम्मी—जो एक बहुत ही बड़ी और ममतामयी गुड़िया थीं—वहाँ आईं। उन्होंने बहुत प्यार से गुड्डी का हाथ पकड़ा और उसे उसके नरम, मखमली बिस्तर की ओर ले गईं।
मम्मी ने गुड्डी को बिस्तर पर लेटाया और उसके ऊपर एक हल्का, गर्म कंबल ओढ़ा दिया। उन्होंने गुड्डी के माथे को चूमा और धीरे से फुसफुसाते हुए कहा, "सो जाओ मेरी प्यारी गुड्डी, अब आराम का समय है। शुभ रात्रि!"
बिस्तर बहुत आरामदायक था और तकिया रुई जैसा मुलायम, लेकिन गुड्डी का मन अब भी कहीं और भटक रहा था। मम्मी ने तो बत्ती बुझा दी, पर गुड्डी की आँखों से नींद कोसों दूर थी।










